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Idea how to change the Society

जय भारत जय विश्व 

समाज को बेरोजगारी मुक्त बनाना 

मानव समाज सागर है और जन -जन /सभी जन लहर (विचार ) है।  मानव जीवन विचार (तरंग ) से विचारों (तरंगो ) को सृजित करता है , अनंत ,अमर जीवन के द्वारा। 

सत्य सरल है। निश्चय ही इसे विज्ञान के द्वारा  सरलतम बनाया जा सकता है।  प्रत्येक मानव के द्वारा।

क्रियायोग विज्ञान 

हम में प्रत्येक वह है जो सब है और जो सब है वह एक है।  सभी धार्मिक विचारधारा को प्रस्तुत करने वाले सभी धार्मिक ग्रन्थ एक ही ईश्वर का उद्घोष करते है।  

सामान्य अनुभव ज्ञान के द्वारा देखा जाये तो यह पाते है कि जीवन डोर(साँस ) एक है।  

समाज को बेरोजगारी मुक्त बनाना 

99 +1 = 100 % सक्सेस 

रोजगार का आशय है की ऐसा माध्यम जिससे आय का निर्माण कर धन अर्जन कर सके। 

प्रत्येक आय विचार और शारीरिक परिश्रम के द्वारा प्राप्त होता है।  चाहे व्यक्ति भौतिक सम्पनता के उच्च स्तर पर कार्यरत हो या न्यून्तम स्तर पर या उससे भी नीचे  वह प्रयासरत रहता है अच्छा और अच्छे के लिए।  भले ही यह समझ विकसित न हो पायी हो की मानव जीवन का क्या लछ्य है?

जन -जन   यह समझ बनाये हुए है कि भौतिक पदार्थ चाहे शरीर हो या अकूत सम्पदा हो का परिवर्तन सुनिश्चित है।  परिवर्तन ही विकासक्रम को क्रियान्वित करता है।  तीव्रता के साथ विकास के लिए एकता  बल का होना एक जन या सब जन  (मानव समाज ) के लिए सर्व और सदैव कल्याणकारी है।  यह विकास है।  

रोजगारी प्राप्ति के अनंत मार्ग मानव द्वारा मानव सहयोग से मानव समाज के लिए , संसार में उपलब्ध है।  चाहे जो।  जन -जन को क्या चाहिए  रोजगार 

मानव /जन बुद्धि कुशग्र है और तार्किक कि हर क्षेत्र में रोजगार को खोल देता है  चाहे जो। 

अधाय्तम ,आतंकवाद ,नक्सलवाद ,शांतिवाद ,धर्मवाद ,राजनीति ,_ _ ______आदि -आदि। 

मानव समाज में जन के प्रयास से सब जनो के लिए प्रचुर सांख्य में रोजगार उपलब्ध है।  

योग (मिलन )अवस्था है और योगा   है पारिभाषित करना , प्रयास है अभ्यास जिससे सर्व उपलब्ध है।  

वर्तमान में योगा  का प्रचार प्रसार विश्व में सामाजिक स्तर पर जन एवं जनो के प्रयास द्वारा जन एवं जनों को सम्बृद्ध कर  रहा है और संसार (मानव समाज ) को उन्नत कर रहा है।  स्वयं को सम्बृद्धि  और संसार को सम्बृद्ध करने का प्रयासी बन।                                                        धार्मिक आध्यत्मिक विचारधारए जो सृजित करती है मानसिक सच्चरितता (धर्म ) मानव हिरदय में जिससे अनुभव एकता प्राप्त होती है।  क्या आप धार्मिकता के प्रभाव से प्रेरित है  और मात्र और मात्र अपने द्वारा ग्रहित समाज में व्याप्त विभिन्न धार्मिक विचारधाराएं  जो निम्न नामों से                                                                                                                                   हिन्दू ,इस्लाम ,सिख ,ईसाई, यहूदी , बौद्ध , जैन ,_   _    _       __  _ आदि।      प्रचलित है   उपरोक्त किसी के अनुयायी है तो अहिंसा /हिंसा  के क्षेत्र  में धार्मिक विचारधारा के अनुयायी बन।                                                                                                                                        नस्ल (जाति ) से प्रभावित हो और अपनी ही नस्ल (जाति ) को प्रभावी और सिमित क्षेत्रफल   को विकसित करने के आतुर है , जातियता के नेतृत्व के लिए।  अपितु सत्य सरल है , प्रत्येक जन के लिए की मानव की जाति एक है और जातियता समाज में अदृश्य विभाजन को रेखांकित करती है लोगों (विचारों ) द्वारा।  नस्लवादी /शांतिवादी  बन।  

और अन्नत क्षेत्र को जोड़ने वाला माध्यम इन्टरनेट से कोई भी सामाजिक जन रोजगार को प्राप्त कर सकता है।  

सभी , आप का स्वागत है।  

























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