Sunday

Freedom from unemployment

बेरोजगारी से स्वतंत्रता

 कैसे भारत ही नही विश्व समाज को बेरोजगारी से मुक्त बनाना है। प्रयास करना मानव के लिए हितकर है और जब लाभ को होना सुनिश्चित है तो साथ सबका  हो।  

15 लाख प्रति परिवार की बड़ी योजना का प्रारम्भ करना क्यों जरुरी है और जन - जन के हित में है।  
विचार करें - 
क्या लोकतंत्र कुछ लोगों को ही आराम(सत्ता - सुख ) देता रहेगा और ये कुछ लोग जनमत को अपने हित, और मन माफिक बात को भाषणों , ढेरो नैतिक /अनैतिक  विचारो से विकास का  करते रहते है।  लेकिन  ऐसे  किसी भी विचार ( योजना ) का गठन नही  करते है।  जिसके द्वारा जन -जन का विकास सुनिश्चित हो।  
क्यों ? 
 जन इस बात को को नही समझ पा रहे है कि राजनीति का मूल भाव क्या " सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय " के अतिरिक्त और भी कुछ है।  

जागो जन - जन जगाओ भारत 

15 लाख प्रति परिवार बड़ी योजना को शुरू होना  है। 
क्या देश के शीर्षतम स्थान पर बैठे आदरणीय जन विचार करें। 


 प्रणाम जन -जन को 
विकास क्या है ? 
विश्व के सभी देश और जन - जन विकास कर रहे है।  भारत देश सदैव से ही मानव विकास की दिशा का मार्गदर्शन करता रहा है।  भारत के सभी दिव्य परमात्मा / आत्मा योगियों ने सच्चे विकास पथ पर चलने का निर्देश अपने विचारों द्वारा प्रकट कर  मानव जाति का विकास करते जा रहे है।  यह बात हर भक्त जानता है, ईश्वर ही सब है।
वर्तमान समाज में विकास की गति को तीर्व करना आसान है जब जन -जन इस बात को विचारों में और अपने विचार से  इस विचार पर विचार करे की विकास कौन कर रहा है।  क्या लोकतंत्र में वह ही विकास कर पाते है जो सत्ता प्राप्ति के लिए अपने अनैतिक / नैतिक भाषणों से जनता को भर्मित कर रहे है।  और पहले से ही विघटित  समाज को तितर -बितर कर रहे है कि जनता का मत (वोट ) बहुमत के रूप में पा कर सत्ता -सुख प्राप्त कर विकास की बाते कर सकें। 
विकास वह शब्द है जो नवीनता की झलक दिखता है।  
वर्तमान भारत में युवा वर्ग उत्साहित है और सजग है विकास करने के लिए और प्रयासरत है। निश्चय ही धन सब नही है लेकिन माध्यम है विकास गति को तीर्व करने का जन -  जन के लिए। 
विचार करें - क्या खोट है इस योजना में 

15 लाख प्रति परिवार 

है तो चाहता हूँ।  कृपा कर बताएं जन -जन 


जन - जन का साथ ही जन - जन विकास है। आप मित्रों से मांग करता हूँ कि इस बड़ी योजना के सृजन हेतु एकजुट हो और भारत देश के एक -  जन को सम्बृद्ध कर, भारत देश को विकसित राष्ट्र बनाना है। 

   





                              -AIM-

 ALLAHABAD INTERNET MARKETING

Unlimited Opportunities for all. 

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            भारत निर्माण में रोजगार का भन्डार 
सुधार और सुधार  - 

21 जून  हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र जी के विचार प्रयास से  भारत देश के आध्यत्मिक ज्ञान योग विज्ञान  का योगा दिवस के रूप में मनाया जाना, हम सब  को सदैव गर्वान्वित करता है।  

Truth is always simple for all. 

सभी जानते है कि मानव की शाक्ति आपार है. यदि वह स्वयं को जानने का प्रयास करे तो निष्चय ही पुनः विचार करेगा कि जीवन का क्या उद्देश्य है। प्रयास ही सफलता का धोतक है। 


आश्चर्य होगा जब आप विचार करेंगे कि प्रत्येक आदमी का चेहरा अलग-अलग  होता है लेकिन साँस एक है। जिसे हम मनुष्य पकड़ सकते है वैज्ञानिक विधि से और जान सकते है वास्तविक जीवन को जो अमर है और अनन्त ऊर्जा है। जो सब रूपों में दृश्य और अदृश्य है।  निश्चय यह विषय वाणी या किसी भी बाहरी साधन से नहीं प्राप्त किया जा सकता है।  इसके लिए हम मनुष्यो को वैज्ञानिक दृष्टिकोण  और इच्छा को सही दिशा में और निश्चय साधन जो क्रियायोग विज्ञान के द्वारा उपलब्ध है , का  अनुसरण करना ही पड़ेगा आज नहीं तो कल या अगली बार या जब पुनः दृश्य होगे मानव रूप में इस स्वपन संसार में।  

हम से प्रत्येक कोई चाहत रखता है की उसे भगवान कृष्ण /गॉड /अल्लाह /नानक/बुद्ध /महावीर / और सब नाम या स्थान  या जहां से आतंरिक शान्ति का आभास होता है। मिल जाये।जिससे जीवन सफल हो जाये। 

                                      क्रियायोग विज्ञान 


वर्तमान समय द्वापर युग का आरोही काल है वर्ष 317  वां   


जैसा हम सभी देख और समझ सकते है कि मानव बुद्धि अनोखे और विषमय करी तथ्यों को उजागर कर रही है। 

Monday

Social party

जय भारत जय विश्व

जन -जन की बात ,जनता  के साथ 
महात्मा ( महान आत्मा ) शब्द द्वारा ऐसे व्यक्तित्व के प्रति सम्बोधन है , जिसने धर्म की आधारशिला जो मात्र अहिंसा है , का अनुसरणकर्ता बनकर भारतीय समाज को एकता के सूत्र में बांध /संगठित कर भारत देश को स्वतन्त्रता से शुशोभित करते हुए , विश्व जन मानस को भी 'अहिंसा परम धर्म ' का पाठ पढ़ाने वाले महापुरुष को सम्पूर्ण विश्व ' महात्मा गाँधी '(मोहनदास करमा चंद गाँधी) के नाम से पुकारते है।  
महात्मा गांधी जी की जीवनचर्या और विचार स्वतः राजनितिक संत के रूप में विश्व समाज को प्रेरित करते है।  गांधी जी द्वारा अहिंसा की व्याख्या " विचार या कृति से किसी जीव  को किसी प्रकार की हानि न पहुँचाना। ऐसे सुन्दर आदर्श धारण एवं कृत्यों द्वारा प्रकट करने वाला जीवन सदैव ही जन -जन की लिए प्रेरणादायी ही है।  महात्मा गांधी की अहिंसा की पुकार मनुष्य की अंतरात्मा को छूती है।  गांधी जी कहते है ' रक्तपात के द्वारा अपने देश को स्वंतंत्र कराने का प्रयास करने की अपेक्षा आवश्यक हुआ तो मै सदियों तक स्वंतंत्रता की प्रतिक्षा करुँगा।  
  ऐसे दृढ़ी अहिंसावादी द्वारा ही भारत की प्रखरता को और प्रकाशित कर विश्व को प्रेरित कर रहा है।  महात्मा गांधी  जी के उच्च सेवाभाव उनके द्वारा लिखे गए " यदि मुझे फिर से जन्म लेना पड़े तो मैं अछूतो के बीच अछूत बन कर ही जन्म लेना चाहुँगा , क्योंकि उसके द्वारा मै और अधिक प्रभावशाली ढंग से उनकी सेवा कर सकूंगा।
यदपि मानव में सदैव 2 प्रकार की प्रवृत्ति रहती है।  1 अहिंसात्मक 2 हिंसात्मक
भारत आदिकाल से ही आध्यत्मिक देश है और आध्यत्म  पथ का पथिक इस बात को अनुभव और सूक्षम विचारों द्वारा यह भान पाता ही है कि अहिंसा के तपते पथ पर चलकर ही वह आध्यत्मिक उन्नति को आतंरिक शान्ति के रूप में पा सकता है।  
महात्मा गांधी जी का  जीवन चरित्र भी अहिंसा को स्पष्ट रूप से विश्व के समक्ष उपलब्ध है।  इस बात को भी  दृष्टिगत करता है।  संसार ने सर्वप्रथम यह भी देखा की किस प्रकार किसी भी देश की सामाजिक कुरीतियों एवं विषमताओं को अहिंसा के बल से सुव्यवस्थित , भेदभाव मुक्त स्वच्छ और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारा , एकता से सामान्य जनों को संगठित कर देश/जन -जन के हित के वास्ते संगठात्मक बल का निर्माण कर , महात्मा गांधी जी ने भारतीय जनों   
एवं विश्व के सभी राष्ट्रों को प्रत्यक्ष यह सिद्ध कर दिया की अहिंसा ही वह  मार्ग है जो एक के लिए ही नही अपितु प्रत्येक जन और राष्ट्र के लिए सर्वोन्नति के मार्ग को बनाता है।  महात्मा गांधी जी का जीवन उन्ही जनों को प्रेरित करता है , जिनकी आतंरिक प्रवित्ति अहिंसात्मक है।  यह भी कटु सत्य है कि हिंसात्मक प्रवित्ति का पोषण करने वाले दुर्बल जनों के लिए गांधी जी के विचार एवं कार्य सदैव फास (शूल )की भांति ही प्राप्त करते रहेंगे।  

भारत के राजनितिक संत गांधी अपने सिद्धांत को इन शब्दों में प्रकट करते है " मैंने देखा कि विध्वंस और विनाश के बीच जीवन चलता रहता है।  इसलिए विनाश से बड़ा कोई नियम अवश्य  है।  केवल उसी नियम के अंतर्गत किसी सुव्यवस्थित समाज का अस्तित्व संभव हो सकता है और जीवन जीने योग्य बन सकता है।  अहिंसा की मानसिक अवस्था प्राप्त करने के लिए काफी कष्टप्रद साधना की आवश्यकता होती  है।  उसके  लिए सैनिक  के जीवन की भांति कठोर अनुशासन बद्ध जीवन की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्णावस्था तभी आती है , जब मन , शरीर एवं वाणी में पूर्ण समन्वय स्थापित हो जाये।  यदि हम सत्य और अहिंसा के नियम को अपने जीवन का नियम बनाने की ठान लें तो , प्रत्येक समस्या अपना समाधान स्वयं प्रस्तुत कर देगी " 

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जन - जन की आवाज जनता की आवाज़ 

Wednesday

Hindi

जय भारत जय विश्व 

संसार में एक ही भाषा है विद्धमान जो है " प्रेम " यही वह भाषा है जिसे समझना और समझाना सहज है।  जन -जन के लिए। 

भारत देश में 14 सितम्बर को राष्ट्रभाषा हिंदी दिवस मनाया जाता है।  भारत के राष्ट्र भाषा हिंदी है।  हिंदी भाषा की सरलता एवं वृहदता असीम है।  

जिस प्रकार विश्व जन समुदाय में बोली जाने वाली भाषाएं आदरणीय एवं सम्मानिये है क्योंकि भाषा कोई भी हो, वह सदैव वक्ता के विचारों को वयक्त करती है " शब्दों " के द्वारा।  

हिंदी भाषा गहनतम विचारों और भावों को स्पष्टता के साथ व्यक्त करती है।  भारत देश के विभिन्न प्रांतो में विभिन्न भाषाएं भारतीयों जनो द्वारा बोली जाती है।  फिर भी प्रत्येक भारतीय इस बात का बोध रखता है कि हिंदी भारत देश के राष्ट्रभाषा है।  यह बोध ही भारत के जन -जन द्वारा दिया गया सम्मान " हिंदी " भाषा को स्वतः ही महान बना रहा है।  

भाषा को दो रूप में व्यक्त करते है।  1 - मौखिक   2  लिखित 

सांकेतिक भाषा भी एक प्रकार है।  ( symbolic Language )
भाषा का क्षेत्रीय रूप बोली कहलाता है।  
किसी प्रान्त अथवा उपप्रान्त की बोलचाल और साहित्य  रचना की भाषा उपभाषा कहलाती है।  एक उप भाषा में एक से अधिक बोलियाँ होती है।  
 उपभाषा  एवं बोलियाँ 
पूर्वी हिंदी - अवधी,बघेली , छत्तीसगढ़ी , भोजपुरी 
पश्चिमी हिंदी - ब्रज, खड़ी बोली, हरियाणवी, कन्नौजी, बुंदेली 
राजस्थानी - मेवाती , मारवाड़ी ,जयपुरी ,मालवी , हाड़ोती 
पहाड़ी - मंडियाली, गढ़वाली, कुमाँऊनी आदि 
मागधी - अंगिका, भोजपुरी, मैथिली,मगही  आदि 
बिहारी - भोजपुरी, मगधी,मैथिली आदि 


जागो जन - जन जगायो भारत 

क्रिययोयोग विज्ञान 


भारत विविध विविधताओं का देश है।  

22 भाषाओं को संविधान में मान्यता प्रदान की गई है।  

असमी , सिंधी , कन्नड़ , कश्मीरी , कोंकड़ी , मराठी , बंगाली , उर्दू , मणिपुरी , गुजरती , उड़िया तेलुगू , डोगरी , संस्कृत , हिंदी , मलयालम , बोडो , तमिल , नेपाली , पंजाबी , संथाली मैथिलि

प्रादेशिक भाषा 

कर्नाटक - कन्नड़                           केरल   - मलयालम              प० बंगाल  - बंगाली 

आंध्रप्रदेश  - तेलुगू  ु                   उड़ीशा  - उड़िया                   तमिलनाडु - तमिल 

हरियाणा -  हरियाणवी                  उ०प्रदेश - हिंदी                     गुजरात  - गुजराती 

मणिपुर  - मणिपुरी                       असम - असमिया                गोवा  - कोंकणी , मराठी 

कश्मीर - कश्मीरी                         पंजाब  - पंजाबी                   महाराष्ट्र  - मराठी  

मातृभाषा  का शाब्दिक अर्थ है  - माँ द्वारा या परिवार द्वारा बोली जाने वाली भाषा।  

" भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343  के  अनुसार 14  सितम्बर 1949 को हिंदी भारत संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान के इसलिए प्रतिवर्ष १४ सितम्बर 

                               हिंदी  दिवस मनाया जाता है।     

अंतरराष्ट्रीय भाषा अभी इंग्लिश है।  

हिंदी सीखिए     क्लिक हियर  


भारत जोड़ो, संसार जुड़े 

इच्छा  को पूरा करवाना , एकता बल से होता है।  भारत एक है।  भारत के एकता , भाषा माध्यम से जुड़ना ऐसा है कि राष्ट्रभाषा का सम्मान - ज्ञान  भारतीय की शान।  


जय सरकार 

-- बांटे रेवाड़ी पुनि - पुनि आपनो ले।  

ब्लॉग सन्देश 
भारत देश,स्वतंत्र राष्ट्र का उद्घोष " जय भारत " जब जन -जन  के कंठो से स्फुटित होता है तो प्रत्येक ही भारत ( ज्ञान + रत ) हो देश को रोशन ही करता है।  
भारत देश के आध्यतमिक पथ के अभ्यास से प्राप्त विचारों को विश्व जन समूह ने स्वीकृत कर , भारत देश के प्रधान मंत्री जी के विचार सम्मान स्वरुप 

21 जून ( विश्व योग दिवस ) 

के रूप मनाया जाना।  प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व की बात है।               

                                                                             आपको सहृदय धन्यवाद 


 

BHARAT JODO SANSAAR JUDE

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समाज तो एक है और समाजों की समयस्या अनेक,जिनमे से एक है बेरोजगारी जो सभी समाजों का अधिकाधिक विघटन को पनपाने में विशेष कारण रखा है. 

सर्वतोन्नति तो तभी है जब एक ही जुट हो।  और सभी जन एक ही है। 


समयस्या का निदान है हुनर 

वर्तमान समय सदैव शान्त ही है।  हलचल है तो समाज के वातावरण में जहां चाहिए विकास जन का, जन -जन का और जन और जन-जन  द्वारा   संभव है।   

                                                        

भारत जोड़ो संसार जुड़े






Goal of Life miracle .

Thursday

जय भारत  जय विश्व
q-r.to/BHARAT

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Thank You,

om Prakash
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Tuesday

Happy Independence Day

जय भारत जय विश्व 

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना जन -जन को 

Success in August 317 D.YUG

Today is 15 August 317 day of india independece

परिवर्तन  की दिशा समाज को सम्बृद्धि करता है।  प्रयास प्रगति का, की ओर में मानव जीवन दिशा भान के भान का प्रयास और सजग  विचार का  भान समर्पित और समर्थवान कर जन -जन में विद्धमान है। 

विचार प्रयास स्वतः प्रयास के फलस्वरूप उदभव विचार असीमितता का अंश / पूणं श मानव जीवन है जो अमर है क्योँकि विचार तरंग मानव रूप को प्रकट करती है।  

धन विचार / ऋण विचार / दैवत विचारों को कर्मबद्ध करता है ऊर्जा रूप में जो अनुभावित चित है जन -जन का प्राणी जन का।  

स्वतंत्र मानव स्वाभाव है।  

हम सभी जन भारत के स्वंतत्रता दिवस हमें , नागरिक एकतत्व भाव का बोधात्मक अनुभव इस विषय (जीवन)पर की धर्म एक है।                          धार्मिक विचारधारएँ हिंदू , इस्लाम , सिख , ईसाई , बौद्ध , जैन  और सब और मानव स्व धर्म इच्छा (मानसिक धर्मचरित्ता )

समाज में से जन /जन -जन इस वैचारिक सूछम भेद का भान धार्मिक विचारधारों के मतभेद ही हिंदू , इस्लामी , सिख , ईसाई और सब  सभी समाज के अभिन्न अंग है। 

हर्षित करने वाला दिन 14 अगस्त भारीतय जनो के हिरदय में विषेशत्म भाव को रखता है और 15 अगस्त का सूर्य भारत की स्वतंत्रता जो भारत जन -जन  के हिर्दय को उल्लासित करता है और सजग करता है।  

भर दो नव प्रकाश को स्वतंत्रता के बेला से। 

सत्य सरल है। 



Friday

Human Society

जय भारत जय विश्व 

समानता एवं अंतर में वही सम्बन्ध होता है ,जो एकता और विभिन्नता  मे है।  वस्तुतः सम और विषम का उदभव केन्द्र एक ही होता है।  जैसे रूप ,रंग ,आकार के रूप में मनुष्यों में  वाह्य  विभिन्नता दृटिगत होती है लेकिन फिर भी प्रत्येक जन स्वाश (साँस ) को भौतिक शरीर मे अनुभव करता है , जो एक है।  

सर्व उन्नति का आधार मात्र विज्ञान है।  विज्ञान अर्थात बृहद (विस्तृत ) + ज्ञान  और परीक्षण (प्रैक्टिकल ) का समिश्रण है , वह है विज्ञान। 

प्रत्येक मनुष्य वैज्ञानिक है।  मनुष्य प्रवृ त्ति  है , खोज करना /और कुछ और की चाह की        वृ त्ति ही प्रत्येक जन को विकास का पाथिक बनाता है।  सामान्य हो ,विशेष हो या अति विशेष जन  हो सभी विकासी है क्योंकि चाहते है ,करते है और पाते है विकास स्वयं का ,समाज का और जन -जन का।  

विश्व मानव समाज चाहे कितने ही देशों के रूप में , कितने ही धार्मिक विचारधारओं मे और असंख्य जातियों मे विभक्त है/हो तब भी प्रत्येक नागरिक /अनुयायी  और जाति वर्ग एक ही मानव समाज को प्रकट करता है।  जन /जन -जन द्वारा।  

सत्य सरल है।  

विश्व में उपलब्ध अनेकों -अनेक आध्यत्मिक धार्मिक विचारधरायें हिन्दु ,इस्लाम ,ईसाई ,सिख ,यहूदी ,बौद्ध ,जैन आदि कितने ही नामों  एवं धार्मिक कर्म -काण्ड ो और पूजा पद्धतियों के द्वारा वाह्य स्तर से विभिन्नता और भिन्नता को प्रदर्शित कर रहे  है फिर भी सभी धार्मिक विचारधारओं द्वारा एक मत से एक ही धर्म का बोध कराती है।                                                                                                   धर्म का अर्थ है , " मानसिक सच्चरितता"

धर्म सागर है और धार्मिक विचारधाएं वह नदियाँ है जिसके द्वारा मानव जीवन मे जीवन को पाने का माध्यम है।  किसी भी धार्मिक धारा की सार्थकता तभी है जो अपने अनुयायीओं को यह अनुभव और विश्वास करा सके की धर्म ही जोड़ता है। मै को मैं से , जन  से जन -जन को। 

क्रियायोग -विज्ञान