Wednesday

UP

जय भारत जय वर्ल्ड 

Nature develops every thing and mind create and designed nature.

                 Thought keeps suprem power.

Time represents human existence that we(YOU+I) are. And life is an idea, every buddy knows idea nevers die, logically Life is immortal and is ONE.
Thus, start from the path where each thing(GOD) is.                                   

Yes, before or after
JOIN 
to connects for full fill all desires.

Festival king is the Independence day. 
Day by day

UP 
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UP  

UP 

                       UP

UP with each up day by day automatically push up for putting in UPs.                           Where Freedom


                                All is Best




Tuesday

Happy Independence Day

जय भारत जय विश्व 

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना जन -जन को 

Success in August 317 D.YUG

Today is 15 August 317 day of india independece

परिवर्तन  की दिशा समाज को सम्बृद्धि करता है।  प्रयास प्रगति का, की ओर में मानव जीवन दिशा भान के भान का प्रयास और सजग  विचार का  भान समर्पित और समर्थवान कर जन -जन में विद्धमान है। 

विचार प्रयास स्वतः प्रयास के फलस्वरूप उदभव विचार असीमितता का अंश / पूणं श मानव जीवन है जो अमर है क्योँकि विचार तरंग मानव रूप को प्रकट करती है।  

धन विचार / ऋण विचार / दैवत विचारों को कर्मबद्ध करता है ऊर्जा रूप में जो अनुभावित चित है जन -जन का प्राणी जन का।  

स्वतंत्र मानव स्वाभाव है।  

हम सभी जन भारत के स्वंतत्रता दिवस हमें , नागरिक एकतत्व भाव का बोधात्मक अनुभव इस विषय (जीवन)पर की धर्म एक है।                          धार्मिक विचारधारएँ हिंदू , इस्लाम , सिख , ईसाई , बौद्ध , जैन  और सब और मानव स्व धर्म इच्छा (मानसिक धर्मचरित्ता )

समाज में से जन /जन -जन इस वैचारिक सूछम भेद का भान धार्मिक विचारधारों के मतभेद ही हिंदू , इस्लामी , सिख , ईसाई और सब  सभी समाज के अभिन्न अंग है। 

हर्षित करने वाला दिन 14 अगस्त भारीतय जनो के हिरदय में विषेशत्म भाव को रखता है और 15 अगस्त का सूर्य भारत की स्वतंत्रता जो भारत जन -जन  के हिर्दय को उल्लासित करता है और सजग करता है।  

भर दो नव प्रकाश को स्वतंत्रता के बेला से। 

सत्य सरल है। 



Friday

Human Society

जय भारत जय विश्व 

समानता एवं अंतर में वही सम्बन्ध होता है ,जो एकता और विभिन्नता  मे है।  वस्तुतः सम और विषम का उदभव केन्द्र एक ही होता है।  जैसे रूप ,रंग ,आकार के रूप में मनुष्यों में  वाह्य  विभिन्नता दृटिगत होती है लेकिन फिर भी प्रत्येक जन स्वाश (साँस ) को भौतिक शरीर मे अनुभव करता है , जो एक है।  

सर्व उन्नति का आधार मात्र विज्ञान है।  विज्ञान अर्थात बृहद (विस्तृत ) + ज्ञान  और परीक्षण (प्रैक्टिकल ) का समिश्रण है , वह है विज्ञान। 

प्रत्येक मनुष्य वैज्ञानिक है।  मनुष्य प्रवृ त्ति  है , खोज करना /और कुछ और की चाह की        वृ त्ति ही प्रत्येक जन को विकास का पाथिक बनाता है।  सामान्य हो ,विशेष हो या अति विशेष जन  हो सभी विकासी है क्योंकि चाहते है ,करते है और पाते है विकास स्वयं का ,समाज का और जन -जन का।  

विश्व मानव समाज चाहे कितने ही देशों के रूप में , कितने ही धार्मिक विचारधारओं मे और असंख्य जातियों मे विभक्त है/हो तब भी प्रत्येक नागरिक /अनुयायी  और जाति वर्ग एक ही मानव समाज को प्रकट करता है।  जन /जन -जन द्वारा।  

सत्य सरल है।  

विश्व में उपलब्ध अनेकों -अनेक आध्यत्मिक धार्मिक विचारधरायें हिन्दु ,इस्लाम ,ईसाई ,सिख ,यहूदी ,बौद्ध ,जैन आदि कितने ही नामों  एवं धार्मिक कर्म -काण्ड ो और पूजा पद्धतियों के द्वारा वाह्य स्तर से विभिन्नता और भिन्नता को प्रदर्शित कर रहे  है फिर भी सभी धार्मिक विचारधारओं द्वारा एक मत से एक ही धर्म का बोध कराती है।                                                                                                   धर्म का अर्थ है , " मानसिक सच्चरितता"

धर्म सागर है और धार्मिक विचारधाएं वह नदियाँ है जिसके द्वारा मानव जीवन मे जीवन को पाने का माध्यम है।  किसी भी धार्मिक धारा की सार्थकता तभी है जो अपने अनुयायीओं को यह अनुभव और विश्वास करा सके की धर्म ही जोड़ता है। मै को मैं से , जन  से जन -जन को। 

क्रियायोग -विज्ञान 


Wednesday

Life

जीवन 

मानव जीवन की महत्ता महान है।  अधिकांश जन सीमितता  के विचारों से इस प्रकार ओत -प्रोत  है कि वास्तविक जीवन का भान तक नहीं कर पाते और यही स्वीकार कर पाते है की मृत्यु (परिवर्तन ) ही को अंत के रूप में देख पाते है। ऐसा मानव जीवन चाहे जितना भी भौतिक सम्पनता से भरा हो और कितने ऊँचे सांसारिक कार्य -व्यपार  में पदस्थ हो सब व्यर्थ ही है।  कोयंकि मानव जीवन के लक्ष्य का भान भी न होना ऐसा है जैसे जानवर का जीवन -चक्र। 

वास्तव मे यह बात तब तक असमझ है जब तक मानव जिज्ञासा किसी ऐसे मार्ग का पथिक  नहीं हो जाता है ,जिसका आधार विज्ञान हो। 

क्रियायोग -विज्ञान 

मानव जीवन यथार्थ में भौतिकता और अध्यत्मिकता का समिश्रण है।  कष्ट  युक्त तब ही तक है जब तक मात्र भौतिकता पूर्ण विचारों को सृजित करते रहेंगे।  खेदजनक बात यह भी है की लोग वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त निष्कर्षो का सार जो भौतिक अस्तित्व के भाग को स्पष्ट करता है।  ऐसी शिक्षा पद्धाति का क्या लाभ जो मानव को जीवन का भान भी न करा सके। 

वर्तमान विश्व के प्रत्येक देश गति के साथ विकास और विनाश की पथ पर क्रियाशील है।  और प्रत्येक धार्मिक विचारधारा  हिन्दू ,इस्लाम ,ईसाई ,सिख , बौद्ध ,जैन ,यहूदी आदि अपने प्रारूप से इस हद तक ज्ञानियों  द्वारा ही धूमिल हो गया है  कि सामान्य जन  को भ्रमित कर रहा है।  यह धार्मिका न्धता के कारण सामाजिक वातावरण का दोहन कर आतंकवाद ,साम्राज्य वाद  और अनगिनत विचारों और भावों द्वारा मन -मस्तिक को पोषित कर  रहा है।  यद्पि सत्य सरल है और यही प्रत्येक सैद्धान्तिक धार्मिक विचारधारा में उपलब्ध है और सभी का मत एक है है।                                       ईश्वर एक है।    

यही सार भी है वेद , बाइबिल ,कुरान ,गुरु ग्रन्थ साहिब और सब ज्ञान यही तो है जो मानव का चरम है।   

Tuesday

International YOGA day

विश्व योगा दिवस (21 जून )

योग (मिलन ) वह अवस्था है जब मैं  का मैं में मिलन (योग ) होता है। मैं के प्रकार को समझने  के लिए एक बृतांत  को लिखता हूँ। 

एक सज्जन स्वामी रामकृष्ण परमहंस के पास सत्संग के लिए पहुंचे। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रश्न किया , महाराज , मुक्ति कब मिलेगी ?

परमहंस जी ने कहा , जब मैं चला जायेगा , तब स्वतः ही मुक्ति की अनुभूति करने लगेंगे।  स्वामी जी ने बताया , मैं 2 तरह का होता है।  एक पक्का मैं और एक कच्चा मैं। 

जो कुछ भी मैं देखता , सुनता या महसूस करता हूँ उसमे कुछ भी मेरा नहीं है , यहाँ तक की यह शरीर भी मेरा नही।  मैं ज्ञानस्वरूप हूँ , यह पक्का मैं है।  

यह मेरा मकान है , यह मेरा पुत्र है , यह मेरी पत्नी है , यह सब सोचना कच्चा मैं है।  

स्वामी जी आगे कहते है , जिस दिन यह दृढ विश्वास हो जायेगा की ईश्वर ही सब कुछ कर रहे है।   , तो समझो जीवन मुक्त हो गया।  

सत्य सरल है। 

मानव उत्थान का मार्ग    क्रिया योग विज्ञान 


 

Saturday

How can we are changing the Society atmosphere.

जय भारत जय विश्व 

विचार क्या है ? विचार कैसे है ? विचार कहाँ है ?और विचारों का सृजनकर्ता कौन है ?

क्रियायोग विज्ञान 


Tuesday

Idea how to change the Society

जय भारत जय विश्व 

समाज को बेरोजगारी मुक्त बनाना 

मानव समाज सागर है और जन -जन /सभी जन लहर (विचार ) है।  मानव जीवन विचार (तरंग ) से विचारों (तरंगो ) को सृजित करता है , अनंत ,अमर जीवन के द्वारा। 

सत्य सरल है। निश्चय ही इसे विज्ञान के द्वारा  सरलतम बनाया जा सकता है।  प्रत्येक मानव के द्वारा।

क्रियायोग विज्ञान 

हम में प्रत्येक वह है जो सब है और जो सब है वह एक है।  सभी धार्मिक विचारधारा को प्रस्तुत करने वाले सभी धार्मिक ग्रन्थ एक ही ईश्वर का उद्घोष करते है।  

सामान्य अनुभव ज्ञान के द्वारा देखा जाये तो यह पाते है कि जीवन डोर(साँस ) एक है।  

समाज को बेरोजगारी मुक्त बनाना 

99 +1 = 100 % सक्सेस 

रोजगार का आशय है की ऐसा माध्यम जिससे आय का निर्माण कर धन अर्जन कर सके। 

प्रत्येक आय विचार और शारीरिक परिश्रम के द्वारा प्राप्त होता है।  चाहे व्यक्ति भौतिक सम्पनता के उच्च स्तर पर कार्यरत हो या न्यून्तम स्तर पर या उससे भी नीचे  वह प्रयासरत रहता है अच्छा और अच्छे के लिए।  भले ही यह समझ विकसित न हो पायी हो की मानव जीवन का क्या लछ्य है?

जन -जन   यह समझ बनाये हुए है कि भौतिक पदार्थ चाहे शरीर हो या अकूत सम्पदा हो का परिवर्तन सुनिश्चित है।  परिवर्तन ही विकासक्रम को क्रियान्वित करता है।  तीव्रता के साथ विकास के लिए एकता  बल का होना एक जन या सब जन  (मानव समाज ) के लिए सर्व और सदैव कल्याणकारी है।  यह विकास है।  

रोजगारी प्राप्ति के अनंत मार्ग मानव द्वारा मानव सहयोग से मानव समाज के लिए , संसार में उपलब्ध है।  चाहे जो।  जन -जन को क्या चाहिए  रोजगार 

मानव /जन बुद्धि कुशग्र है और तार्किक कि हर क्षेत्र में रोजगार को खोल देता है  चाहे जो। 

अधाय्तम ,आतंकवाद ,नक्सलवाद ,शांतिवाद ,धर्मवाद ,राजनीति ,_ _ ______आदि -आदि। 

मानव समाज में जन के प्रयास से सब जनो के लिए प्रचुर सांख्य में रोजगार उपलब्ध है।  

योग (मिलन )अवस्था है और योगा   है पारिभाषित करना , प्रयास है अभ्यास जिससे सर्व उपलब्ध है।  

वर्तमान में योगा  का प्रचार प्रसार विश्व में सामाजिक स्तर पर जन एवं जनो के प्रयास द्वारा जन एवं जनों को सम्बृद्ध कर  रहा है और संसार (मानव समाज ) को उन्नत कर रहा है।  स्वयं को सम्बृद्धि  और संसार को सम्बृद्ध करने का प्रयासी बन।                                                        धार्मिक आध्यत्मिक विचारधारए जो सृजित करती है मानसिक सच्चरितता (धर्म ) मानव हिरदय में जिससे अनुभव एकता प्राप्त होती है।  क्या आप धार्मिकता के प्रभाव से प्रेरित है  और मात्र और मात्र अपने द्वारा ग्रहित समाज में व्याप्त विभिन्न धार्मिक विचारधाराएं  जो निम्न नामों से                                                                                                                                   हिन्दू ,इस्लाम ,सिख ,ईसाई, यहूदी , बौद्ध , जैन ,_   _    _       __  _ आदि।      प्रचलित है   उपरोक्त किसी के अनुयायी है तो अहिंसा /हिंसा  के क्षेत्र  में धार्मिक विचारधारा के अनुयायी बन।                                                                                                                                        नस्ल (जाति ) से प्रभावित हो और अपनी ही नस्ल (जाति ) को प्रभावी और सिमित क्षेत्रफल   को विकसित करने के आतुर है , जातियता के नेतृत्व के लिए।  अपितु सत्य सरल है , प्रत्येक जन के लिए की मानव की जाति एक है और जातियता समाज में अदृश्य विभाजन को रेखांकित करती है लोगों (विचारों ) द्वारा।  नस्लवादी /शांतिवादी  बन।  

और अन्नत क्षेत्र को जोड़ने वाला माध्यम इन्टरनेट से कोई भी सामाजिक जन रोजगार को प्राप्त कर सकता है।  

सभी , आप का स्वागत है।