Monday

Social party


कांग्रेस पार्टी ही नही जन -जन की आवाज़ है। 
हिरदयस्थ मित्रों 
भारत के नव राजनीति का प्रारम्भ  और विश्व को अहिंसा परमो धर्म को सजीव कर देश को एक सूत्र में बांधने का कार्यZ अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रमुखतम उपलब्धि है जिसके दम पर भारत देश ने स्वतंत्रता को प्राप्त किया।  
मित्रों] कांग्रेस ही वह सामान भाव रखती है। जन &जन के लिए चाहे आप किसी भी धार्मिक विचारधारा के अनुयायी हो और समाज के किसी भी वर्ग@जाति के हो। नैतिक @अनैतिक भाषाणों द्वारा सत्ता प्राप्त करना आसान है क्योंकि निकट अतीत में अन्य पार्टियों ने जो भ्रम विकास के नाम पर सभी प्रचार माध्यमों से फैला कर सत्ता को प्राप्त किया। जन&जन@जनता को जिस विकास का सपना दिखाया जा रहा है]वस्तुतः वह सामाजिक विघटन है जिससे विकास नही विनाश ही प्राप्त होगा। 
जनता को प्रचार और भीड़  द्वारा मात्र कुछ समय के लिए भर्मित किया जा सकता है।  सदैव नही। 
कांग्रेसी ¼महात्मा गाँधी ½ ने ही बताया और सिखाया कि धर्म एक है % अहिंसा परम धर्म % बाकी सब धार्मिक विचारधारएँ है]जो विश्व  समाज में  हिन्दु ]इस्लाम ]सिख ]ईसाई ]यहूदी ]बौद्ध ]जैन आदि अन्य असंख्य नामों से मानव समाज रूपी सागर में धार्मिक नदियाँ है।  सभी धार्मिक विचारधारा का सार एक है % ईश्वर एक है % 
जागो जन&जन और विचार करे की कांग्रेस का सूत्र वास्तविक उन्नति को जन &जन को प्राप्त कराता है।   
                        कांग्रेस पार्टी ही नही जन -जन की आवाज़ है।



बनत -बनत बन जाए 

राजनीति और अध्यात्म 

धर्मनीति 

धर्मनीति है मानव का कल्याण कर  सकती है।  यदपि विश्व समाज धीरे -धीरे ही यह बात समझ में ला रहा है कि "धर्म एक है "और धार्मिक विचारधाराए अनेक है।  धर्म का अर्थ है " मानसिक सचचरित्ता " और धार्मिक विचारधाराएं है -हिन्दु ,इस्लाम ,सिख ,ईसाई ,यहूदी ,बौद्ध ,जैन आदि -आदि 

जागो जन - जन ,जगाओ भारत 

राजनीति और

अध्यात्म का सामंजस्य ही भारत के उत्थान को पुनः प्रकट कर रहा है। राजनीति का आशय है "नीति एवं शासन से प्रशासन द्वारा जन -जन को सर्वजन हिताय सर्वेजन सुखाय का अनुभव करना "

वर्तमान राजनीतिज्ञो का सत्ता की  प्राप्ति तक केंद्रित है और इसका कारण भी है की अज्ञानता के कारण सीमितता का होना। सीमितता तो सीमितता है चाहे किसी भी धार्मिक विचार धारा तक हो या विशेष वर्ग /क्षेत्र तक या फिर सवा सौ करोङ की बात करे।  ऐसा कोई जन कभी न तो समाज का न ही विश्व को संगठित कर सकता है।  जैसा भारत के राजनीतिक संत "महात्मा गांधी "जी ने धर्म का आधार "अहिंसा परम धर्म " पर चलकर और 

अध्यात्म के राजयोग पथ क्रियायोग विज्ञान का अभ्यास कर एकता बल से भारतीये समाज ,देश और विश्व को सुव्यवस्थित कर पाना संभव है।   "लोकप्रियता " स्व्पन संसार का तिलिस्म है।  

सत्य सरल है। देता वही है , जिसे प्राप्त हो।  

श्रद्दे

अध्यात्म योगी श्री सत गुरु योगी श्री सत्यम जी के श्री चरणो में कोटि -कोटि नमन


जय भारत जय विश्व 

नव प्राचीन भारत की आजादी का आंदोलन के दौरान भारतीय राजनीति दल का गठन हुआ।  

अखिल भारतीय कांग्रेस 

के राजनीतिक संत का अभ्युदय हुआ।  जिसके मार्ग का प्रकाश सदैव ही जन -जन  और विश्व के सारे देशों को निश्चय ही प्रकाशवान ही बनाता है।  

" अहिंसा परम धर्म "

को धारण करने वाले शांति प्रचारक , राजनेता  महात्मा गांधी के असाधारण व्यक्तिव छवि और विचारों की तरंग प्रेरणा रूप में सदैव हमें /विश्व जनों को प्रेरित ही करेगी।  महात्मा गांधी जी के जीवन की ढाल श्री गीता का उद्घोष अहिंसा परम धर्मः , जिसमे साधरत हो।  भारतीय जनों को संगठित कर ऐसे जन आंदोलन का का सूत्रपात  किया।  जिससे विभिन्न भागों में बंटा भारतीय समाज का जन -जन भारतीय एकता के रूप में प्रकट भारतीय शक्ति की व्यपकता का असर इतना तीव्र था कि शासकों को समझ आ गयी कि भारत जन की एकता शक्ति अतुलनीय है। 

है जग में सूरमा वही जो रहा अपनी बनाता है 

कोई चलता है पदचिन्हो पर कोई पदचिन्ह बनाता है 

जय श्री कृष्ण ,अल्लाह हो अकबर ,वाहे गुरु जी की फ़तेह ,ईश्वर एक है। 

गुजरात , भारत देश का वह प्रान्त जो ऐसे राजनितिक संत की जन्मस्थली है जिनका गुणगान भारतीय जन -जन ही नही अपितु विश्व जनों  आदरणीय आदर्श वयक्तित्व के रूप चिन्हित है।  

" अहिंसा परम धर्म "

 का सूत्र स्वतः ही " महात्मा गाँधी " जी का नाम प्रकाशित करता है।वर्तमान गुजरात की नही भारत के प्रत्येक भाग के नागरिकों की यही अभिलाषा है की भारत देश को विकसित राष्ट्र के श्रेणी में बनाए। सहज संभव है।  

विचारशीलता ,मानव मस्तिक का वह तीव्रतम प्रयास बल है जिससे ही जन -जन और सम्पूर्ण समाज विकास कर रहा है।  

गुजरात प्रान्त को समृद्धिवान और निवासियों को समृद्धशाली बनने की अनिवर्यता इसलिए अधिक है की सब चाहते है विकास। 

विकास का अभिप्राय क्या है ?

यह बात विचारनीय है , २०१७  के चुनाव काल में।  क्योंकि गुजरात प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा घोषणा चुनाव कार्यकर्म की होना सुनिश्चित हो चुका है।  

विकास से विजय 

हिरदयस्थ मित्रों 

कांग्रेस पार्टी ही नही , जन - जन की आवाज़ है। 
जन - जन/ जनता इतना समझ रखती  ही है कि राजनीति का अर्थ है " नीति एवं शासन से प्रशासन द्वारा ' सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय '  जन -जन को अनुभव कराना "
मित्रों , निकट अतीत में  और वर्तमान में भारतीय राजनीति  का इस प्रकार  पतन हुआ  कि किसी एक प्रदेश  में ही नही  बल्कि पूरे भारतवर्ष में भ्रष्टाचार रूपी दानव  ने घुसपैठ  कर भरतीय अखंड समाज को खंड -खंड करते जा रहा है।  

मित्रों , विचार तो करना ही पड़ेगा की जब 

प्रत्येक भारतीय के दिल में भारत बसता है और जन -जन देशभक्त है तो भ्रष्टाचार कहाँ पनप रहा है?  और  फल -फूल रहा है। 

जन -जन जानें , जन -जन जागे 

निश्चय ही भ्रष्टाचार का  सूत्रपात अज्ञानता ,स्वार्थता,सीमितता ,अति धन अर्जन की इच्छा , सत्ता -सुख ,मान -प्रतिष्ठा की लालसा के वशीभूत होना ही भ्रष्टाचार का जन्मना है। फिर भी समाज हितैषी सेना ,शासनिक ,प्रशासनिक ,व्यपारिक और जन -जन देशभक्त दिखने का प्रयासी  बना है तो भ्रष्टाचार कहाँ  पनप रहा है और फल - फूल रहा है। 

वर्तमान समय भारतीय गुजराती मित्रों ( न नर न नारी एक त्रिपुरारी) और उन प्रदेशों के जनों के वास्ते गंभीर है की जन -जन , सकुटुम्ब ,ससमाज विचार करे ही की क्या धार्मिक विचारधाराएं ( हिन्दु ,इस्लाम,सिख,ईसाई ,पारसी ,बौद्ध ,जैन आदि )को 'धर्म ' की संज्ञा दिए हुए।  समाज को खंडित ही करे रहेंगे कि यह भी मनन प्रयास करेंगे की वास्तव  में धर्म का अर्थ है

 " मानसिक सच्चरितता " 

धर्म जोड़ता है यह ज्ञान सभी धार्मिक विचारधाराओं द्वारा और पवित्र धार्मिक पुस्तकों से अनुयायी जानता है। की धर्म एक है जैसे ईश्वर एक है। 

दूसरी सबसे बड़ी बाधा है विकासपथ की एक मानव समाज में असंख्य जातियों /वर्गों का प्रचलन जिसका सीधा और बड़ा लाभ वह लोग पाते है जो एक समाज को तोड़ने के लिए और सिमित क्षेत्र /वर्ग के हितकारी बनकर उग्र अनैतिक विचार वाणी द्वारा स्वयं को नेता बता रहे है। यह बात सामान्य जन भी समझ सकता है की जब तक आतंरिक सामाजिक वैचारिक विघटन के स्थान पर जन -जन को एकता बल के साथ और समहित भाव से समाज को जोड़ते रहे तो निश्चय ही विकास से विजय प्राप्त होना ही है।  जन -जन के लिए , जन -जन के द्वारा। 

अह्वान विचार

 

चल पड़े दो पग जिधर , चले कोटि -कोटि पग उधर 

भारतीय आज़ादी आंदोलन के बृहद इतिहास से यह स्पष्टता के साथ प्रकट है की भारत में ही नही अपितु विश्व समुदाय ने भी प्रथम दृढ़तम अहिंसात्मकता के सूत्र (अहिंसा परम धर्म ) से सिंचित आंदोलनकारी ' महात्मा गांधी ' जी का मार्ग ही 'अखिल भारतीय कांग्रेस दल ' का आधार है  और श्री गीता सार है।  " अहिंसा परमो धर्मः "

कांग्रेस पार्टी ही नही जन -जन की आवाज़ है। 

गुजरात कितना विकसित हुआ २०१७ अब तक यक़ीनन जितना भी हुआ जन -जन के प्रयास से हुआ और हो रहा है।  

विकास से विजय  

चुनाव समय पुनः मत दाता को सबल करने वाला है कि गुजरात प्रदेश की शासन व्यवस्था किसे दे। 

सत्य सरल है।  चाहे भारत देश का कोई भी भाग /प्रदेश हो सभी नागरिकों की चाहत है की मूलभूत दैनिक सामाजिक जरूरतों और समस्यों का निदान ऐसा हो की टिकाऊ हो।  संभव है। 
विकास से विजय का अभिप्राय यही दृष्टिगत करता है कि वर्तमान गुजरात की विकास धार को पैनी करना।  

जन -जन की आवाज़ बने कांग्रेस सरकार 

आरक्षण 

एक मीठा जहर समाज को समाजों द्वारा राजनीति से सत्ता के लिए।  असहमति /सहमति का मनन तर्क -वितर्क के व्यवहारिक जाल से मुक्त करता जाता है आरक्षण से।  सामाजिक वातावरण की निर्मलता ही विकास का विकास है। वर्तमान व्यवस्थाओं में परिवर्तन जन -जन के समहित और सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय का लागु होना ही , एक समाज में तीव्र परिवर्तन लहर है।  आरक्षण का आधार और चयन की प्रक्रिया ऐसी होना अनि वार्य है जिससे समाज और विकसित हो सके नाकि सिमित क्षेत्र /वर्ग ही लभित हो।  आरक्षणथी को सरल -सबल बना किसी भी हुनर ढंग द्वारा सुसंचालित करने का अर्थ है , समाज से आरक्षण प्रथा का मूल समाधान। 

  

     




डिजिटल युग 

भारत देश के विकास की बात हो तो क्या किया कांग्रेस ने ?

आज का भारत जिस डिजिटल दुनिया को और सुसज्जित करने के लिए उत्साहित है , क्या इस बात को विस्मृत कर रहा है या अनैतिक विचारों के द्वारा सत्ता के अभिलाषी अखंड भारत की जनता को विस्मृत कराने  के लिए  प्रयासरत है लेकिन इन सभी अज्ञानी जनों को यह बात समझ में लानी ही पड़ेगी की क्योंकि वास्तविकता को जन -जन /जनता जानती है की भारत देश के स्वर्णिम भविष्य की  रूप रेखा और सम्बंधित आवयश्क कार्य को कांग्रेस की माननीयों ने उपलब्ध करा कर इस बात को निश्चित कर दिया है की कांग्रेस की समझ का आधार सत्ता की प्राप्ति तक सिमित नहीं है अपितु वह तो अतीत से भारत देश के जन -जन की आवाज़ है। 

आज हम सभी जिस डिजिटलिज़शन की बात कर रहे है उसका आधार भारत  देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी के उस भाव को सदैव वयक्त करता ही रहेगा।   देश की उन्नति ही कांग्रेसी जनों का राजनितिक आधार है , न की मिया मिठू बनना।  

" भारत देश में डिजिटल युग का प्रारम्भ " अखिल भारतीय कांग्रेस "  सरकार के नीतियों एवं समाज हित का  वह उदाहरण है जो चरितार्थ है।


क्रियायोग का प्रसार - भारत वर्ष का विस्तार  

श्रद्धेय श्री आध्यतमिक योगी श्री सत्यम कोटि -कोटि नमन 

ट्विटर बोलता है   

जय भारत जय विश्व 


पब्लिक सिस्टम 

लोकतंत्र - का गठन और उद्देश्य ही है " सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय " के विचार ,भाव और प्रयास जन -जन का ,जन -जन द्वारा स्वतः जनतंत्र  को  प्रकट कर रहा है।  लोकतंत्र संचालन वास्ते धन प्राप्त होता है 

" टैक्स से " टैक्स वह निधि है , जन -जन जानता है कि जनता का धन है।  जन -जन जागे। 

क्रियायोग का प्रसार -भारतवर्ष का विस्तार 


Wednesday

Hindi

जय भारत जय विश्व 

संसार में एक ही भाषा है विद्धमान जो है " प्रेम " यही वह भाषा है जिसे समझना और समझाना सहज है।  जन -जन के लिए। 

भारत देश में 14 सितम्बर को राष्ट्रभाषा हिंदी दिवस मनाया जाता है।  भारत के राष्ट्र भाषा हिंदी है।  हिंदी भाषा की सरलता एवं वृहदता असीम है।  

जिस प्रकार विश्व जन समुदाय में बोली जाने वाली भाषाएं आदरणीय एवं सम्मानिये है क्योंकि भाषा कोई भी हो, वह सदैव वक्ता के विचारों को वयक्त करती है " शब्दों " के द्वारा।  

हिंदी भाषा गहनतम विचारों और भावों को स्पष्टता के साथ व्यक्त करती है।  भारत देश के विभिन्न प्रांतो में विभिन्न भाषाएं भारतीयों जनो द्वारा बोली जाती है।  फिर भी प्रत्येक भारतीय इस बात का बोध रखता है कि हिंदी भारत देश के राष्ट्रभाषा है।  यह बोध ही भारत के जन -जन द्वारा दिया गया सम्मान " हिंदी " भाषा को स्वतः ही महान बना रहा है।  

भाषा को दो रूप में व्यक्त करते है।  1 - मौखिक   2  लिखित 

सांकेतिक भाषा भी एक प्रकार है।  ( symbolic Language )
भाषा का क्षेत्रीय रूप बोली कहलाता है।  
किसी प्रान्त अथवा उपप्रान्त की बोलचाल और साहित्य  रचना की भाषा उपभाषा कहलाती है।  एक उप भाषा में एक से अधिक बोलियाँ होती है।  
 उपभाषा  एवं बोलियाँ 
पूर्वी हिंदी - अवधी,बघेली , छत्तीसगढ़ी , भोजपुरी 
पश्चिमी हिंदी - ब्रज, खड़ी बोली, हरियाणवी, कन्नौजी, बुंदेली 
राजस्थानी - मेवाती , मारवाड़ी ,जयपुरी ,मालवी , हाड़ोती 
पहाड़ी - मंडियाली, गढ़वाली, कुमाँऊनी आदि 
मागधी - अंगिका, भोजपुरी, मैथिली,मगही  आदि 
बिहारी - भोजपुरी, मगधी,मैथिली आदि 


जागो जन - जन जगायो भारत 

क्रिययोयोग विज्ञान 


भारत विविध विविधताओं का देश है।  

22 भाषाओं को संविधान में मान्यता प्रदान की गई है।  

असमी , सिंधी , कन्नड़ , कश्मीरी , कोंकड़ी , मराठी , बंगाली , उर्दू , मणिपुरी , गुजरती , उड़िया तेलुगू , डोगरी , संस्कृत , हिंदी , मलयालम , बोडो , तमिल , नेपाली , पंजाबी , संथाली मैथिलि

प्रादेशिक भाषा 

कर्नाटक - कन्नड़                           केरल   - मलयालम              प० बंगाल  - बंगाली 

आंध्रप्रदेश  - तेलुगू  ु                   उड़ीशा  - उड़िया                   तमिलनाडु - तमिल 

हरियाणा -  हरियाणवी                  उ०प्रदेश - हिंदी                     गुजरात  - गुजराती 

मणिपुर  - मणिपुरी                       असम - असमिया                गोवा  - कोंकणी , मराठी 

कश्मीर - कश्मीरी                         पंजाब  - पंजाबी                   महाराष्ट्र  - मराठी  

मातृभाषा  का शाब्दिक अर्थ है  - माँ द्वारा या परिवार द्वारा बोली जाने वाली भाषा।  

" भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343  के  अनुसार 14  सितम्बर 1949 को हिंदी भारत संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान के इसलिए प्रतिवर्ष १४ सितम्बर 

                               हिंदी  दिवस मनाया जाता है।     

अंतरराष्ट्रीय भाषा अभी इंग्लिश है।  

हिंदी सीखिए     क्लिक हियर  


भारत जोड़ो, संसार जुड़े 

इच्छा  को पूरा करवाना , एकता बल से होता है।  भारत एक है।  भारत के एकता , भाषा माध्यम से जुड़ना ऐसा है कि राष्ट्रभाषा का सम्मान - ज्ञान  भारतीय की शान।  


जय सरकार 

-- बांटे रेवाड़ी पुनि - पुनि आपनो ले।  

ब्लॉग सन्देश 
भारत देश,स्वतंत्र राष्ट्र का उद्घोष " जय भारत " जब जन -जन  के कंठो से स्फुटित होता है तो प्रत्येक ही भारत ( ज्ञान + रत ) हो देश को रोशन ही करता है।  
भारत देश के आध्यतमिक पथ के अभ्यास से प्राप्त विचारों को विश्व जन समूह ने स्वीकृत कर , भारत देश के प्रधान मंत्री जी के विचार सम्मान स्वरुप 

21 जून ( विश्व योग दिवस ) 

के रूप मनाया जाना।  प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व की बात है।               

                                                                             आपको सहृदय धन्यवाद 


 

Thursday

जय भारत  जय विश्व
q-r.to/BHARAT

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Thank You,

om Prakash
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Tuesday

Happy Independence Day

जय भारत जय विश्व 

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना जन -जन को 

Success in August 317 D.YUG

Today is 15 August 317 day of india independece

परिवर्तन  की दिशा समाज को सम्बृद्धि करता है।  प्रयास प्रगति का, की ओर में मानव जीवन दिशा भान के भान का प्रयास और सजग  विचार का  भान समर्पित और समर्थवान कर जन -जन में विद्धमान है। 

विचार प्रयास स्वतः प्रयास के फलस्वरूप उदभव विचार असीमितता का अंश / पूणं श मानव जीवन है जो अमर है क्योँकि विचार तरंग मानव रूप को प्रकट करती है।  

धन विचार / ऋण विचार / दैवत विचारों को कर्मबद्ध करता है ऊर्जा रूप में जो अनुभावित चित है जन -जन का प्राणी जन का।  

स्वतंत्र मानव स्वाभाव है।  

हम सभी जन भारत के स्वंतत्रता दिवस हमें , नागरिक एकतत्व भाव का बोधात्मक अनुभव इस विषय (जीवन)पर की धर्म एक है।                          धार्मिक विचारधारएँ हिंदू , इस्लाम , सिख , ईसाई , बौद्ध , जैन  और सब और मानव स्व धर्म इच्छा (मानसिक धर्मचरित्ता )

समाज में से जन /जन -जन इस वैचारिक सूछम भेद का भान धार्मिक विचारधारों के मतभेद ही हिंदू , इस्लामी , सिख , ईसाई और सब  सभी समाज के अभिन्न अंग है। 

हर्षित करने वाला दिन 14 अगस्त भारीतय जनो के हिरदय में विषेशत्म भाव को रखता है और 15 अगस्त का सूर्य भारत की स्वतंत्रता जो भारत जन -जन  के हिर्दय को उल्लासित करता है और सजग करता है।  

भर दो नव प्रकाश को स्वतंत्रता के बेला से। 

सत्य सरल है। 



Friday

Human Society

जय भारत जय विश्व 

समानता एवं अंतर में वही सम्बन्ध होता है ,जो एकता और विभिन्नता  मे है।  वस्तुतः सम और विषम का उदभव केन्द्र एक ही होता है।  जैसे रूप ,रंग ,आकार के रूप में मनुष्यों में  वाह्य  विभिन्नता दृटिगत होती है लेकिन फिर भी प्रत्येक जन स्वाश (साँस ) को भौतिक शरीर मे अनुभव करता है , जो एक है।  

सर्व उन्नति का आधार मात्र विज्ञान है।  विज्ञान अर्थात बृहद (विस्तृत ) + ज्ञान  और परीक्षण (प्रैक्टिकल ) का समिश्रण है , वह है विज्ञान। 

प्रत्येक मनुष्य वैज्ञानिक है।  मनुष्य प्रवृ त्ति  है , खोज करना /और कुछ और की चाह की        वृ त्ति ही प्रत्येक जन को विकास का पाथिक बनाता है।  सामान्य हो ,विशेष हो या अति विशेष जन  हो सभी विकासी है क्योंकि चाहते है ,करते है और पाते है विकास स्वयं का ,समाज का और जन -जन का।  

विश्व मानव समाज चाहे कितने ही देशों के रूप में , कितने ही धार्मिक विचारधारओं मे और असंख्य जातियों मे विभक्त है/हो तब भी प्रत्येक नागरिक /अनुयायी  और जाति वर्ग एक ही मानव समाज को प्रकट करता है।  जन /जन -जन द्वारा।  

सत्य सरल है।  

विश्व में उपलब्ध अनेकों -अनेक आध्यत्मिक धार्मिक विचारधरायें हिन्दु ,इस्लाम ,ईसाई ,सिख ,यहूदी ,बौद्ध ,जैन आदि कितने ही नामों  एवं धार्मिक कर्म -काण्ड ो और पूजा पद्धतियों के द्वारा वाह्य स्तर से विभिन्नता और भिन्नता को प्रदर्शित कर रहे  है फिर भी सभी धार्मिक विचारधारओं द्वारा एक मत से एक ही धर्म का बोध कराती है।                                                                                                   धर्म का अर्थ है , " मानसिक सच्चरितता"

धर्म सागर है और धार्मिक विचारधाएं वह नदियाँ है जिसके द्वारा मानव जीवन मे जीवन को पाने का माध्यम है।  किसी भी धार्मिक धारा की सार्थकता तभी है जो अपने अनुयायीओं को यह अनुभव और विश्वास करा सके की धर्म ही जोड़ता है। मै को मैं से , जन  से जन -जन को। 

क्रियायोग -विज्ञान 


Wednesday

Life

जीवन 

मानव जीवन की महत्ता महान है।  अधिकांश जन सीमितता  के विचारों से इस प्रकार ओत -प्रोत  है कि वास्तविक जीवन का भान तक नहीं कर पाते और यही स्वीकार कर पाते है की मृत्यु (परिवर्तन ) ही को अंत के रूप में देख पाते है। ऐसा मानव जीवन चाहे जितना भी भौतिक सम्पनता से भरा हो और कितने ऊँचे सांसारिक कार्य -व्यपार  में पदस्थ हो सब व्यर्थ ही है।  कोयंकि मानव जीवन के लक्ष्य का भान भी न होना ऐसा है जैसे जानवर का जीवन -चक्र। 

वास्तव मे यह बात तब तक असमझ है जब तक मानव जिज्ञासा किसी ऐसे मार्ग का पथिक  नहीं हो जाता है ,जिसका आधार विज्ञान हो। 

क्रियायोग -विज्ञान 

मानव जीवन यथार्थ में भौतिकता और अध्यत्मिकता का समिश्रण है।  कष्ट  युक्त तब ही तक है जब तक मात्र भौतिकता पूर्ण विचारों को सृजित करते रहेंगे।  खेदजनक बात यह भी है की लोग वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त निष्कर्षो का सार जो भौतिक अस्तित्व के भाग को स्पष्ट करता है।  ऐसी शिक्षा पद्धाति का क्या लाभ जो मानव को जीवन का भान भी न करा सके। 

वर्तमान विश्व के प्रत्येक देश गति के साथ विकास और विनाश की पथ पर क्रियाशील है।  और प्रत्येक धार्मिक विचारधारा  हिन्दू ,इस्लाम ,ईसाई ,सिख , बौद्ध ,जैन ,यहूदी आदि अपने प्रारूप से इस हद तक ज्ञानियों  द्वारा ही धूमिल हो गया है  कि सामान्य जन  को भ्रमित कर रहा है।  यह धार्मिका न्धता के कारण सामाजिक वातावरण का दोहन कर आतंकवाद ,साम्राज्य वाद  और अनगिनत विचारों और भावों द्वारा मन -मस्तिक को पोषित कर  रहा है।  यद्पि सत्य सरल है और यही प्रत्येक सैद्धान्तिक धार्मिक विचारधारा में उपलब्ध है और सभी का मत एक है है।                                       ईश्वर एक है।    

यही सार भी है वेद , बाइबिल ,कुरान ,गुरु ग्रन्थ साहिब और सब ज्ञान यही तो है जो मानव का चरम है।   

Tuesday

International YOGA day

विश्व योगा दिवस (21 जून )

योग (मिलन ) वह अवस्था है जब मैं  का मैं में मिलन (योग ) होता है। मैं के प्रकार को समझने  के लिए एक बृतांत  को लिखता हूँ। 

एक सज्जन स्वामी रामकृष्ण परमहंस के पास सत्संग के लिए पहुंचे। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रश्न किया , महाराज , मुक्ति कब मिलेगी ?

परमहंस जी ने कहा , जब मैं चला जायेगा , तब स्वतः ही मुक्ति की अनुभूति करने लगेंगे।  स्वामी जी ने बताया , मैं 2 तरह का होता है।  एक पक्का मैं और एक कच्चा मैं। 

जो कुछ भी मैं देखता , सुनता या महसूस करता हूँ उसमे कुछ भी मेरा नहीं है , यहाँ तक की यह शरीर भी मेरा नही।  मैं ज्ञानस्वरूप हूँ , यह पक्का मैं है।  

यह मेरा मकान है , यह मेरा पुत्र है , यह मेरी पत्नी है , यह सब सोचना कच्चा मैं है।  

स्वामी जी आगे कहते है , जिस दिन यह दृढ विश्वास हो जायेगा की ईश्वर ही सब कुछ कर रहे है।   , तो समझो जीवन मुक्त हो गया।  

सत्य सरल है। 

मानव उत्थान का मार्ग    क्रिया योग विज्ञान